रिया और अर्जुन की प्रेम कहानी
एक घर में तीन भाई और एक बहन रहते थे। तीनों भाइयों के नाम थे विक्रम, करण, और रोहित। उनकी बहन का नाम था रिया।
वो लोग बहुत रईस थे। उनका बड़ा सा बंगला था, कई गाड़ियाँ थीं, नौकर-चाकर थे, और शहर में उनका बहुत नाम था। पैसे की कोई कमी नहीं थी।
तीनों भाई अपने पिता का बिज़नेस संभालते थे, और रिया घर की सबसे लाडली थी। जो भी मांगती, तुरंत मिल जाता। बाहर से उनका परिवार बहुत खुश दिखाई देता था।
लेकिन उनकी दौलत के पीछे एक और चेहरा भी था। विक्रम, करण और रोहित सिर्फ बड़े बिज़नेसमैन ही नहीं थे... बहुत खतरनाक लोग भी थे। शहर में उनका नाम डर से लिया जाता था।
उनके साथ खड़ा था मलिक। मलिक भी अमीर, ताकतवर और खौफनाक नाम वाला आदमी था। शहर के बड़े-बड़े लोग उससे डरते थे।
तीनों भाइयों ने पहले सोचा था कि रिया की शादी मलिक से करेंगे। क्योंकि उनके हिसाब से मलिक जैसा आदमी ही उनके घर की इज्जत संभाल सकता था।
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि रिया का दिल पहले ही किसी और को दे चुका था... उसका नाम था अर्जुन।
रिया और अर्जुन एक-दूसरे से गहरा प्यार करते थे।
एक दिन तीनों भाई अपने घर के बगीचे में एक टेबल पर बैठे थे। सामने महंगी बोतलें रखी थीं। तीनों एक-एक पैग बनाकर अपने बिज़नेस की सफलता की खुशी मना रहे थे।
विक्रम बोला,
“आज हमारी कंपनी शहर की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है।”
करण बोला,
“अब हमें कोई नहीं रोक सकता।”
रोहित बोला,
“आज का दिन यादगार होगा।”
तभी अचानक गेट के बाहर एक बड़ी काली गाड़ी आकर रुकी।
गाड़ी का दरवाज़ा खुला... और उसमें से मलिक उतरा। लेकिन इस बार उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी... उसके चेहरे पर भयंकर गुस्सा था। आँखें लाल थीं और मुट्ठियाँ भींची हुई थीं।
तीनों भाई उसे देखकर बोले,
“अरे आओ! सही समय पर आए हो!”
विक्रम बोला,
“हम अभी तुम्हारी ही बात कर रहे थे।”
करण बोला,
“आज जश्न अधूरा था... अब पूरा होगा।”
रोहित बोला,
“बैठो... तुम्हारे बिना मज़ा कहाँ आता है?”
करण हँसकर बोला,
“अरे, एक पैग जल्दी बनाओ यार इनके लिए... तब मज़ा आएगा!”
नौकर जल्दी से बोतल, बर्फ और ग्लास लेकर आ गया।
लेकिन मलिक ने ग्लास दूर करते हुए कहा,
“मैं यहाँ पीने नहीं आया हूँ!”
यह कहकर उसने अपनी जेब से एक तस्वीर निकाली और टेबल पर पटक दी।
तीनों भाइयों ने जैसे ही तस्वीर देखी, उनके चेहरों का रंग उड़ गया।
उस तस्वीर में रिया और अर्जुन एक-दूसरे की बाहों में थे। दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी, और साफ दिख रहा था कि दोनों के बीच गहरा प्यार था।
विक्रम गुस्से से कांपने लगा।
करण बोला,
“ये नामुमकिन है!”
रोहित बोला,
“ये फोटो... कहाँ से मिला?”
मलिक बोला,
“ये सिर्फ तस्वीर नहीं... तुम्हारे घर का छुपा हुआ सच है।”
उधर रिया ऊपर कमरे की खिड़की से सब कुछ देख रही थी। उसके हाथ कांप रहे थे, आँखों में आँसू थे, और दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
मलिक गुस्से में बोला,
“सबसे पहले अर्जुन का काम तमाम करो... बाकी बातें बाद में देखेंगे।”
रिया डर गई। उसने अर्जुन को फोन किया।
फोन बजता रहा... लेकिन अर्जुन ने फोन नहीं उठाया।
रिया बोली,
“कुछ गड़बड़ है... मुझे अर्जुन के पास जाना होगा।”
वो जल्दी-जल्दी नीचे आई।
जैसे ही नीचे पहुँची, रोहित ने पूछा,
“रिया... कहाँ जा रही हो?”
रिया बोली,
“कॉलेज जा रही हूँ।”
रोहित बोला,
“आज तो संडे है।”
रिया बोली,
“एक्स्ट्रा क्लास है।”
तभी विक्रम बोला,
“अरे जाने दो... क्यों रोक रहे हो?”
रिया बाहर निकल गई।
उसके जाते ही रोहित बोला,
“भैया... रिया सीधा अर्जुन के पास ही जा रही है।”
विक्रम मुस्कुराया और बोला,
“मुझे पता है।”
रिया जल्दी-जल्दी अर्जुन के घर पहुँची।
अर्जुन आराम से बैठा था। मोबाइल टेबल पर पड़ा था।
रिया गुस्से में बोली,
“मैं इतनी देर से फोन कर रही थी... और तुम फोन नहीं उठा रहे थे?”
अर्जुन हल्के से बोला,
“क्या हुआ... इतना गुस्सा क्यों?”
रिया की आँखों में आँसू आ गए।
वो बोली,
“मुझे भूल जाओ।”
अर्जुन चौंक गया।
रिया बोली,
“मेरे भाइयों को हम दोनों के बारे में पता चल गया। बस यही वजह है।”
अर्जुन बोला,
“सिर्फ इतनी सी बात?”
रिया बोली,
“ज़िंदगी से बढ़कर कुछ भी नहीं होता, अर्जुन।”
वो मुड़कर जाने लगी।
तभी अर्जुन बोला,
“जीता हूँ जिसके लिए... जिसके लिए मरता हूँ... बस तू ही वो लड़की है, जिसे मैं प्यार करता हूँ।”
रिया रुक गई। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
वो दौड़कर अर्जुन के पास आई और उसे गले लगा लिया।
दोनों के बीच प्यार फिर से जाग उठा।
तभी अचानक बाहर कई गाड़ियाँ आकर रुकीं।
दरवाज़ा ज़ोर से पीटा गया।
धड़ाम! धड़ाम!
विक्रम की आवाज़ आई,
“अर्जुन! दरवाज़ा खोल!”
दरवाज़ा टूट गया।
विक्रम, करण, रोहित और मलिक अंदर घुस आए।
रिया को खींचकर अलग कर दिया गया। वो चीखती रही,
“नहीं! अर्जुन को मत मारो!”
लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी।
तीनों भाई अर्जुन पर टूट पड़े। घूंसे, लातें, धक्के... कमरा लड़ाई के शोर से भर गया।
अर्जुन भी चुप नहीं रहा। उसने पूरी ताकत से जवाब दिया।
रिया रोती रही।
लेकिन गुस्से में हालात इतने बिगड़ गए कि सब कुछ खत्म हो गया।
कुछ देर बाद कमरा शांत था।
रिया और अर्जुन ज़मीन पर पड़े थे... दोनों बुरी तरह घायल।
रिया ने काँपते हाथ से अर्जुन का हाथ पकड़ा।
अर्जुन ने आखिरी बार उसकी तरफ देखा।
दोनों की आँखों से आँसू निकले... और उनकी पकड़ ढीली पड़ गई।
विक्रम, करण, रोहित और मलिक स्तब्ध खड़े थे।
जिस इज़्ज़त को बचाने निकले थे... उसी ने सब कुछ खत्म कर दिया था।
समाप्त